Guru Is God

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Tuesday, May 19, 2020

बेरोजगारी पर निबंध

मजदूरी की दर से तात्पर्य प्रचलित मजदूरी की दर से है और मजदूरी प्राप्त करने की इच्छा का अर्थ प्रचलित मजदूरी की दरों पर कार्य करने की इच्छा है। यदि कोई व्यक्ति उसी समय काम करना चाहे जब प्रचलित मजदूरी की दर पंद्रह रुपए प्रतिदिन हो और उस समय काम करने से इन्कार कर दे, जब प्रचलित मजदूरी बारह रुपए प्रतिदिन हो, ऐसे व्यक्ति को बेकार अथवा बेरोजगारी की अवस्था से त्रस्त नहीं कहा जा सकता।

बेरोजगारी की हानियाँ
बेरोजगार होने पर हम सरकार पर दायित्व होते हैं सरकार बेरोजगार युवाओं के ऊपर बहुत धन व्यय करती है जैसे गैहू को 18 रुपया में खरीद कर 1.5 रुपये में देती है । जिससे सरकार का बहुत नुकसान होता है।

बेरोजगारी के प्रकार

    • संरचनात्मक बेरोजगारी : सरचनात्मक बेरोजगारी वह बेरोजगारी है जो अर्थव्यवस्था मे होने वाले संरचनात्मक बदलाव के कारण उत्पन्न होती है।

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    गुरू बिन मोक्ष नही प्रश्न:- क्या गुरू के बिना भक्ति नहीं कर सकते? उत्तर:- भक्ति कर सकते हैं, परन्तु व्यर्थ प्रयत्न रहेगा। प्रश्न:-...